उत्तरप्रदेश के बिजनौर के रहने वाले पेशे से वकील सैयद साल 1980 से अहमदाबाद में रह रहे हैं और उनकी टेबल की शान नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी एक तस्वीर.
सैयदकहतेहैं, "मैं बिजनौर जाता हूं तो दिन के छः घंटे बिजली मौजूद नहीं होती है लेकिन यहां छह मिनट को भी बिजली नहीं जाती. सड़कें देखो, लोगों का काम धंधा देखो, यहां पिछले दस सालों से दंगे तो छोड़ दो कर्फ्यू तक नहीं लगा. सब नरेन्द्र मोदी की बदौलत." सैयद दंगा पीड़ितों के मुक़दमे नहीं लड़ते क्योंकि वो जानते नहीं कि कौन पीड़ित है कौन अपराधी.
वो मानते हैं, "दंगे कोई करता नहीं बस हो जाता है. भीड़ जूनून में कुछ कर बैठती है और दंगे कहां नहीं होते?"
सैयद के अनुसार मोदी को 25 से 30 फ़ीसदी मुसलमान वोट मिलेंगे, "ख़ासतौर पर बोहरा, इस्मायली, शिया और वो सब जो पढ़े लिखे हैं." नरेन्द्र मोदी गुजरात के चुनावों में सदभावना और विकास की बात पर जोर दे रहे हैं और उनकी सभाओं में दाढ़ियाँ और टोपियाँ भी दिखने लगी हैं. दंगों के 10 साल बाद क्या सोच है राज्य के मुसलमानों की?
सैयदकहतेहैं, "मैं बिजनौर जाता हूं तो दिन के छः घंटे बिजली मौजूद नहीं होती है लेकिन यहां छह मिनट को भी बिजली नहीं जाती. सड़कें देखो, लोगों का काम धंधा देखो, यहां पिछले दस सालों से दंगे तो छोड़ दो कर्फ्यू तक नहीं लगा. सब नरेन्द्र मोदी की बदौलत." सैयद दंगा पीड़ितों के मुक़दमे नहीं लड़ते क्योंकि वो जानते नहीं कि कौन पीड़ित है कौन अपराधी.
वो मानते हैं, "दंगे कोई करता नहीं बस हो जाता है. भीड़ जूनून में कुछ कर बैठती है और दंगे कहां नहीं होते?"
सैयद के अनुसार मोदी को 25 से 30 फ़ीसदी मुसलमान वोट मिलेंगे, "ख़ासतौर पर बोहरा, इस्मायली, शिया और वो सब जो पढ़े लिखे हैं." नरेन्द्र मोदी गुजरात के चुनावों में सदभावना और विकास की बात पर जोर दे रहे हैं और उनकी सभाओं में दाढ़ियाँ और टोपियाँ भी दिखने लगी हैं. दंगों के 10 साल बाद क्या सोच है राज्य के मुसलमानों की?
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