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Wednesday, 19 November 2014

राजीव दीक्षित Part-2

राजीव दीक्षित (३० नवम्बर १९६७ - ३० नवम्बर २०१०) एक भारतीय वैज्ञानिक ,प्रखर वक्ता और आजादी बचाओ आन्दोलन के संस्थापक थे। वे भारत के विभिन्न भागों मेंविगत बीस वर्षों से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के विरुद्ध जन जागरण का अभियान चलाते रहे। आर्थिक मामलों पर उनका स्वदेशी विचार सामान्य जन से लेकर बुद्धिजीवियों तक को आज भी प्रभावित करता हैे। बाबा रामदेव ने उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें भारत स्वाभिमान (ट्रस्ट) के राष्ट्रीय महासचिव का दायित्व सौंपा था, जिस पद पर वे अपनी म्रित्यु तक रहे। वे राजीव भाई के नाम से अधिक लोकप्रिय थे।

राजीव दीक्षित का जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद की अतरौली तहसील के नाह गाँव में राधेश्याम दीक्षित एवं मिथिलेश कुमारी के यहाँ हुआ। इण्टरमीडिएट तक की शिक्षा फिरोजाबाद से प्राप्त करने के उपरान्त उन्होंने इलाहाबाद से बी. टेक. तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर से एम. टेक. प्राप्त की। राजीव के माता-पिता उन्हें एक वैज्ञानिक बनाना चाहते थे। [ कृपया उद्धरण जोड़ें ] पिता की इच्छाको पूर्ण करने हेतु कुछ समय भारत के सीएसआईआर तथा फ्रांस के टेलीकम्यूनीकेशन सेण्टर में काम किया। तत्पश्चात् वे भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ० ए पी जे अब्दुल कलाम के साथ जुड़ गये जो उन्हें एक श्रेष्ठवैग्यानिक के साँचे में ढालने ही वाले थे किन्तु राजीव भाई ने जब पं० राम प्रसाद 'बिस्मिल' की आत्मकथा का अध्ययन किया तो अपना पूरा जीवन ही राष्ट्र-सेवा में अर्पित कर दिया। उनका अधिकांश समय महाराष्ट्र के वर्धा जिले में प्रो० धर्मपाल के कार्य को आगे बढाने में व्यतीत हुआ। राजीव भाई के जीवन में सरलता और विनम्रता कूट-कूट कर भरी थी। वे संयमी, सदाचारी, ब्रह्मचारी तथा बलिदानी थे। उन्होंने निरन्तर साधना की जिन्दगी जी । सन् १९९९ में राजीव जी के स्वदेशी व्याख्यानों की कैसेटों ने समूचे देश में धूम मचा दी थी। पिछले कुछ महीनों से वे लगातार गाँव गाँव शहर शहर घूमकर भारत के उत्थान के लिए और देश विरोधी ताकतों और भ्रष्टाचारियों को पराजित करने केलिए जन जागृति पैदा कर रहे थे। राजीव भाई बिस्मिल की आत्मकथा से इतने अधिक प्रभावित थे कि उन्होंने बच्चन सिंह से आग्रह कर-करके फाँसी से पूर्व उपन्यास लिखवा ही लिया। लेखक ने यह उपन्यास राजीव भाई को ही समर्पित किया था। राजीव पिछले 20 वर्षों से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों व उपनिवेशवाद के खिलाफ तथा स्वदेशी की स्थापना के लिए संघर्ष कर रहे थे।
[ संपादित करें ] योगदान
पिछले 20 वर्षों में राजीव भाई ने भारतीय इतिहास से जो कुछ सीखा उसकी जानकारी आम जनता को दी| उदाहरणार्थ अँग्रेज़ भारत क्यों आए ?, उन्होंने हमें गुलाम क्यों बनाया ?, अँग्रेजों ने भारतीय संस्कृति, शिक्षा उद्योगों को क्यों नष्ट किया, और किस तरह नष्ट किया ? इस विषय पर विस्तार से सबको बताया ताकि हम पुनः गुलाम न बन सकें| इन बीस वर्षों में राजीव भाई ने लगभग १५००० से अधिक व्याख्यान दिये जिनमेंसे कुछ आज भी उपलब्ध हैं| आज भारत में ५००० से अधिक विदेशी कम्पनियाँ व्यापार करके हमें लूट रही हैं, उनके खिलाफ राजीव भाई ने स्वदेशी आन्दोलन की शुरुआत की| देश में सबसे पहली स्वदेशी-विदेशी की सूची तैयार करके स्वदेशी अपनाने का आग्रह प्रस्तुत किया| १९९१ में डंकल प्रस्ताव के खिलाफ घूम-घूम कर जन-जागृति की और रैलियाँ निकालीं| कोका कोला और पेप्सी जैसे प्राणघातक कोल्ड ड्रिंक्स के खिलाफ अभियान चलाया और कानूनी कार्यवाही की| १९९१-९२ में राजस्थान के अलवर जिले में केडिया कम्पनी के शराब-कारखानों को बन्द करवाने में अहम् भूमिका निभायी| १९९५-९६ में टिहरी बाँध के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चे में संघर्ष किया और पुलिस लाठी चार्ज में काफी चोटें खायीं| उसके बाद १९९७ में सेवाग्राम आश्रम, वर्धा में प्रख्यात् इतिहासकार प्रो० धर्मपाल के सानिध्य में अँग्रेजों के समय के ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन करके समूचे देशको आन्दोलित करने का काम किया| पिछले १० वर्षों से स्वामी रामदेव के सम्पर्क में रहने के बाद ९ जनवरी २००९को स्वामीजी के विशेष आग्रह पर भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का पूर्ण उत्तरदायित्व अपने कन्धों पर सम्हाला। ३० नवम्बर २०१० को छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर में हृदय गति अवरुद्ध हो जाने पर उनका देहांत हो गया।
भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत की सम्पूर्ण आजादी के आंदोलन में आहुति देने वाले भारत स्वाभिमान के राष्ट्रीय सचिव, स्वदेशी आंदोलन के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रीय चितंक भाई राजीव दीक्षित जी के निधन के बाद समय मानो रुक सा गया। सम्पू्र्ण राष्ट्र में, विश्व के विभिन्न देशों में शोक की लहर दौड गई। परमात्मा के उस प्रतिभाशाली पुत्र को खोने के बाद मां ही नहीं भारत मां भी आँसू न रोक पाई होगी। लोग कहा करते है कि पूर्व सांसद स्व, प्रकाशवीर शास्त्री के बादकिसी व्यक्तित्व का वक्तव्य सुनकर समय ठहर जाता था तो उस व्यक्ति का नाम था “राजीव भाई”। “तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहे न रहे ।” उन्होंने अपने जीवन, जवानी व अपनी प्रतिभा को मातृभूमि की बलिवेदी पर आहूत कर दिया। महात्मा गांधी आश्रम वर्धा (महाराष्ट्र), इलाहाबाद, हरिद्वार आदिउनकी कर्मभूमि के मुख्य केन्द्र थे। यद्यपि उनका जन्म स्थान अलीगढ उत्तर प्रदेश हुआ। मां मिथलेश, पिता श्री राधेश्याम दीक्षित के दो पुत्र श्री राजीव एवं श्री प्रदीप जी तथा एक पुत्री बहन लता और उन सब में भी राजीव भाई सबसे बडे थे। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से B-Tech करते समय से ही आपके भीतर राष्ट्र के लिए कुछ कर गुजरने की तमन्ना पैदा हुई। भारतीय सभ्यता, भारतीय संस्कृति पर मंडरा रहेखतरों को लेकर आक्रोश पैदा हुआ। मां भारती को मानसिक गुलामी, विदेशी भाषा-विदेशी षड्यन्त्रों के मकडजाल से मुक्त करवाने के लिए अपने “आजादी बचाओ आन्दोलन” को स्वर प्रदान किया।

*. राजीव भाई जिनका निष्कलंक जीवन सादगी, स्वदेशी , पवित्रता, भक्ति, श्रद्घा, विश्वास से भरा हुआ था। चाहे लोगों ने उन्हें कितना भी कष्टदिया हो उन्होंने उफ नहीं की।

राजीव दीक्षित

आपने श्री राजीव दीक्षित जी के बारे में कई बार सुना होगा पर क्या आप उनके कार्यो बारे में जानते है ???
अगर आपके ह्रदय में अपने देश के लिए थोडा सा भी प्रेम है तो कृपया थोडा सा समय निकाल कर एक बार श्री राजीव दीक्षित जी के बारे में अवश्य जाने.

भोपाल गेस हत्याकांड की गुनाहगार कंपनी(UNION CARBIDE - एक अमिरीकी कंपनी) जिसकी वजह से २२,००० लोगो की जान गयी, उस कंपनी को हमारी सरकार ने माफ़ कर दिया था लेकिन श्री राजीव दीक्षित जी को यह बात नहीं जमी और उन्होंने इस २२,००० बेगुनाह भारतीयो की हत्या करने वाली कंपनी को इस देश से भगाया..

श्री राजीव दीक्षित जी ने १९९१ में डंकल प्रस्ताव के खिलाफ घूम-घूम कर जन-जागृति की और रैलियाँ निकालीं|
उन्होंने विदेशी कंपनियों द्वारा हो रही भारत की लूट, खासकर कोका कोला और पेप्सी जैसे प्राण हर लेने वाले, जहरीले कोल्ड ड्रिंक्स आदि के खिलाफ अभियान चलाया और कानूनी कार्यवाही की|
१९९१-९२ में राजस्थान के अलवर जिले में केडिया कम्पनी(जो हर दिन चार करोड़ लीटर दारू बनाने वाली थी) के शराब-कारखानों को बन्द करवाने में श्री राजीव भाई जी ने बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभायी|
१९९५-९६ में टिहरी बाँध के खिलाफ ऐतिहासिक मोर्चे में उन्होंने बहुत संघर्ष किया और वहाँ पर हुए पुलिस लाठी चार्ज में उन्हें काफी चोटें भी आई.
इसी प्रकार श्री राजीव दीक्षित जी ने CARGIll , DU PONT, केडिया जैसी कई बड़ी विदेशी कंपनियों को भगाया जो इस देश को बड़े पैमाने पर लूटने की नियत से इस देश में अपना डेरा जमाना चाहती थी.
उसके बाद १९९७ में सेवाग्राम आश्रम, वर्धा में प्रख्यात् इतिहासकार प्रो० धर्मपाल के साथ अँग्रेजों के समय के ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन करके समूचे देश को संगठित और आन्दोलित करने का काम किया|
अपने व्याख्यानों से देश के स्वाभिमान को जगाने, देश को संगठित करने में बहुत महत्वपूर्ण योगदान निभाया.
राजीव भाई ने स्वदेशी आंदोलन तथा आजादी बचाओ आंदोलन की शुरुआत की तथा इनके प्रवक्ता बने |
मजबूत तथ्यों और दमदार आवाज के साथ उनके व्याख्यानों में इतनी सच्चाई और चुम्बक-जेसा आकर्षण होता था कि सभी लोग उन्हें सुनने के लिए खिचे चले आते थे...
उनके दिमाग में ५,००० से भी अधिक वर्षो का ज्ञान समाहित था.
उन्हें चलता फिरता एनसाइक्लोपेडिया कहा जाता है.
श्री राजीव जी के हृदय में अत्यंत तीव्र ज्वाला थी, इस भ्रष्ट तंत्र, भ्रष्ट व्यवस्था के प्रति. इस देश कि गरीबी को देखकर उनकी आखो से आंसु निकल पड़ते थे.
बिना मीडिया की सहायता के उन्होंने पुरे देश को जगाया.
राजीव दीक्षित जी के अन्दर एक महान वैज्ञानिक, एक महान विचारक, एक महान इतिहासकार, एक महान वैध्य, एक महान वक्ता, एक महान शोधकर्ता, एक महापुरुष के सभी गुण विद्यमान थे.
उन्होंने बिना दवाईयों के पूरा जीवन स्वस्थ रहने के अत्यंत सरल सिद्धांत बताये, जिनसे आज लाखो लोग लाभान्वित हो रहे है.
राजीव भाई ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की 150वीं जयंती की शाम को कोलकाता में आयोजित किये गए कार्यक्रम का नेतृत्व किया, जो कि विभिन्न संगठनों व प्रख्यात व्यक्तियों द्वारा प्रोत्साहित व प्रचारित किया गया था, और पूरे देश में मनाया गया था |
उन्होंने नयी दिल्ली में स्वदेशी जागरण मंच के नेतृत्व में 50,000 लोगों को संबोधित किया |
हमारे देश का धन विदेशी बेंको में काले धन के रूप में जमा पड़ा है, इस बात की जानकारी सबसे पहले पुरे देश की जनता को भाई राजीव दीक्षित जी ने ही बताई थी.
जनलोकपाल जेसे कानूनों के बारे में सर्वप्रथम इस देश को श्री राजीव दीक्षित जी ने ही बताया.
राइट टू रिजेक्ट और राइट तो रिकॉल जैसे कई मजबूत कानूनों के बारे में पुरे देश को जानकारी दी.
भारत को पुनः विश्वगुरु केसे बनाया जाये, इसका बहुत ही सरल और प्रमाणिक उपाय श्री राजीव दीक्षित जी ने ही बताये.
हमारे देश के हजारो-लाखो साल पुराने स्वर्णिम अतीत को कई वर्षो तक अध्ययन कर पुरे देश को इस बारे में बताया और हमारे गौरव से अवगत करवाया.
अंग्रेजी भाषा की सच्चाई के बारे में पुरे देश को बताया.
संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता के बारे में गहन अध्ययन कर देश को बताया.
देश में पहली बार विदेशी कंपनियों के षड्यन्त्र के बारे में बहुत बड़े स्तर लोगो पर बताया.
स्वदेशी के स्वीकार और विदेशी के बहिस्कार की बात देश को पूरी प्रमाणिकता के साथ बताया.
भारत की विश्व को क्या क्या देन रही, इस बारे में अतिमहत्वपूर्ण जानकारिया बताई.
श्री राजीव दीक्षित जी ने ही हमें बताया की सबसे पहले प्लेन का आविष्कार भारत के श्री बापू जी तलपडे ने किया था वो भी राइट बंधुओ से सात साल पहले.
जन गन मन और वन्दे मातरम की सच्चाई के बारे में पहली बार पुरे देश को उन्होंने ही बताया.
पहली बार इस देश में श्री राम कथा को एक नए देशभक्ति सन्दर्भ में प्रस्तुत करने वाले भी श्री राजीव दीक्षित जी ही है.
उदारीकरण और वेस्विकरण की सच्चाई को पुरे देश के सामने रखा, और इसके कई दुस्प्र्भावो से देश को बचाने के लिए अपनी अंतिम स्वांस तक प्रयास करते रहे.
हमारे देश के गाँव गाँव में जाकर इस देश की हर एक समस्या को देखा, समझा तथा उसके निवारण के लिए प्रभावशाली उपाय बताये और किये.
वो होमियोपेथी और आयुर्वेद के महान विद्वान रहे है.
महर्षि वाघभट्ट जी के अस्टाग हृदयं नमक ग्रन्थ को कई वर्षी तक अध्ययन कर उसे आज की जलवायु एवं परिस्थितियों के हिसाब से पुनर्रचित किया तथा बहुत ही सरल तरीको से उसे आम जनता के बीच बताया जिससे हम बिना किसी दवाई के, बस खाने-पीने आदि के समय और सही तरीके मात्र से स्वस्थ रहने के उपाय बताये.
श्री राजीव दीक्षित ने लाखोँ लोगो के दिलो-दिमाग में प्रत्यक्ष रूप से देशभक्ति की ज्वाला नहीं अपितु धधकता लावा प्रज्वलित किया.
इस देश को केसे महाशक्ति बनाया जा सकता है, इसके लिए बहुत ही सरल उपाय बाताये जिन उपायों पर आज बहुत से लोग कार्य कर रहे है.
ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए बहुत ही जबरदस्त उपाय बताये.
ग्लोबल वार्मिंग एवं वैश्विक भूक्मरी को एक साथ ख़त्म करने के लिए पुरे प्रमाणों के साथ सिद्ध किया की अगर मांसाहारी खाना खाना बंद कर दिया जाये तो दोनों समस्याओं से एक साथ छुटकारा पाया जा सकता है.
विदेशी सद्यान्त्रो से पहली बार पुरे देश को अवगत करवाया.
उनके पास हर एक समस्या का समाधान बहुत ही सरलता और प्रमाणिकता के साथ उपलब्ध रहता था.
पेट्रोल डीजल आदि की समस्या का छुटकारा पाने के लिए कुछ साथियों के साथ मिलकर उन्होंने गोबर गेस से वहिकल चलाने के सफल प्रयोग किये जिसमे नाम मात्र का खर्चा आता है.
श्री राजीव दीक्षित जी ने ही पेप्सी और कोका-कोला जेसे खतरनाक जहर के बारे में पहली बार पुरे देश को बताया तथा लोगो को बहुत बड़े स्तर पर जागृत किया.
हमारे देश की बिजली उत्पादन से सम्बंधित समस्या के प्रमाणिक उपाय बताये.
उनके द्वारा बताये गए सभी उपाय इतने असरदार, दमदार और सरल है की उन्हें जिस दिन लागु किया जाये उसी दिन उस समस्या का समाधान हो जाये.
उनके ह्रदय में स्वदेश के प्रति इतनी तड़प थी की वो रात दिन अपने अंतिम स्वांस तक बस स्वदेश और स्वदेशी के लिए ही कार्य करते रहे.
उन्होंने पुरे देश में १५,००० से अधिक प्रत्यक्ष व्याख्यान दिए और अगर उनके अप्रत्यक्ष व्याख्यानों (T.V., CD, DVD, Internet etc) को शामिल किया जाये तो गिनती करना असंभव हो जायेगा.
श्री राजीव दीक्षित जी ने विभिन्न विषयों पर अनेकों लेख व पुस्तकें लिखी हैं - बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का मकड़जाल, अष्टांग ह्रदयम् (स्वदेशी चिकित्सा), हिस्ट्री ऑफ द एमेन्सिस, भारत और यूरोपीय संस्कृति, स्वदेशी : एक नया दर्शन, हिन्दुस्तान लिवर के कारनामे आदि आदि.
श्री राजीव दीक्षित ने पिछले ३० वर्षो तक हमारे देश के लिए कई घातक कानूनों को बनने से रोका तथा कई अच्छे कानून बनवाने में उनका योगदान रहा.
भारतीय और पश्चिमी संस्कृति, सभ्यता आदि पर गहन अध्ययन कर पुरे देश के सामने रखा.
श्री धर्मपाल जी के साथ मिलकर हमारे पुराने गौरवशाली इतिहास को पुनः एकत्रित किया और पूरे देश में प्रचारित किया.
उन्होंने कई बार अपनी जान पर खेलकर कई घातक कानूनों और खतरनाक विदेशी कम्पनियों को हमारे देश में आने से रोका.
देश की रक्षा करते हुए उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा. लेकिन श्री राजीव दीक्षित जी पीछे नहीं हटे.
देश हित के कई कार्यो में कई बार उन्हें और उनके साथियों को लाठियां-गोलियां खानी पड़ी लेकिन उन्होंने कभी अपने कदम पीछे नहीं बढ़ाये.
श्री राजीव दीक्षित ने भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के लिए एक बहुत ही मजबूत आधार बना कर हमें दिया है जिस पर इस देश को बहुत जल्द महाशक्ति बनाया जा सकता है.
श्री राजीव दीक्षित जी बिना मीडिया की सहायता के ही पुरे देश के कोने कोने में जाकर रात-दिन ब्याख्यान देते रहे.
उनकी आवाज जेसे भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आग उगलने वाली आवाज हो.
उनके सीने में देश के प्रति इतना प्रेम एवं तड़प थी की जेसे वो एक पल में ही इस देश को पुनः विश्वगुरु बना दे और अगर आज ही उनके बताये गए उपायों को हमारे देश में लागु कर दिया जाये तो सच में एक ही पल में ये देश पुनः विश्वगुरु बन सकता है.
हमारे देश की गरीबी, भूखमरी आदि विकट समस्याओं को देखकर उनका दिल भर आता था.
श्री राजीव दीक्षित ने हमें हमारे स्वर्णिम अतीत के बारे में बताकर हमारा स्वाभिमान जगाया.
भारत स्वाभिमान आन्दोलन उनके दिमाग की ही देन है.
स्वामी रामदेव जी के संपर्क में आने के बाद ९ जनवरी २००९ को स्वामीजी और श्री राजीव दीक्षित जी ने भारत स्वाभिमान ट्रस्ट शुरू किया और इसका पूर्ण दायित्व अपने कंधो पर संभाला और पुरे देश के गांव-गांव शहर शहर में घूम कर स्वदेशी कि अलख जगाई.
श्री राजीव दीक्षित जी ने पूर्ण निर्भीकता के साथ विदेशी कंपनियों की पोल खोली, तथा बहुत सारी विदेशी कंपनियों को हमारे देश से खदेड़ा जो कि हमारे देश को बहुत बुरी तरह लूट रही थी/लुटने वाली थी.
श्री राजीव दीक्षित जी ने ही डंकल प्रस्ताव के खिलाफ पुरे देश में गाँव गाँव जाकर जाग्रति फेलाई वरना आज हम अन्न के दाने दाने के लिए विवश हो जाते.
श्री राजीव दीक्षित जी लाखो युवाओ को देशभक्ति की राह पर लाये और उनके जीवन को दिव्य बना दिया जो की पश्चिमी सभ्यता एवं मानसिक गुलामी में पूर्ण रूप से डूब चुके थे.
श्री राजीव दीक्षित जी अपनी हर एक बात प्रामाणिकता के साथ कहते थे उनके पास हर एक बात के तथ्य,सबूत होता था.
उनके दिमाग में कम्पूटर से भी तेज गणनाए कर पाने की अद्भुत क्षमता थी.
श्री राजीव दीक्षित जी के पास बहुत बार विदेशी कंपनियों और आसुरी ताकतों की धमकियां एवं ऑफर भी आते थे परन्तु श्री राजीव दीक्षित ना तो कभी बिके और न ही कभी रुके.
श्री राजीव दीक्षित जी पुरे जीवन ब्रह्मचारी रहे तथा पूरा का पूरा जीवन देश हित के कार्यो में लगा दिया.
श्री राजीव दीक्षित जी ने ही हमें “पूर्ण स्वराज” की परिभाषा समझाई, और इसे प्राप्त करने के बहुत ही असरदार तरीके बताये.
राजीव भाई जिनका निष्कलंक जीवन सादगी, स्वदेशी , पवित्रता, भक्ति, श्रद्घा, विश्वास से भरा हुआ था। चाहे लोगों ने उन्हें कितना भी कष्ट दिया हो उन्होंने उफ नहीं की।
पूज्य स्वामी रामदेव जी का राजीव भाई से पहला संवाद कनखल के आश्रम मे हुआ था।
राजीव भाई लगभग दो ढाई दशक से अपना संपूर्ण जीवन लोगों के लिये जी रहे थे।
राजीव भाई भगवान के भेजे हुए एक श्रेष्ठतम रचना थे, धरती पर एक ऐसी सौगात जिसे हम चाह कर भी पुन: निर्मित नहीं कर सकते।
राजीव भाई के ह्रदय में एक ऐसी आग थी, जिससे प्रतीत होता था कि वे अभी ही भ्रष्ट तंत्र को, भ्रष्टाचार को खत्म कर देंगे।
‘भारत स्वाभिमान’ आंदोलन के साथ आज पूरा देश उनके साथ खडा हुआ है।
हम सबको मिल करके भारत स्वाभिमान का जो संकल्प राजीव भाई ने लिया था, उसे पूरा करना है और अब वो साकार रुप ले चुका है।
जब भारत स्वाभिमान का आंदोलन बहुत बडे चरण पर है तो एक बहुत बडी क्षति हुई है जिसे शब्दों में बयान नही किया जा सकता। ये ह्रदय की नहीं बल्कि समस्त राष्ट्र की पीडा है।
व्यक्ति जब समिष्ट के संकल्प के साथ जीने लगता है तो वो सबका प्रिय हो जाता है। वे अपने माता-पिता के लाल नही थे, बल्कि करोडों-करोडों लोगों के दुलारे और प्यारे थे। वे भारत माता के लाल थे।
एक मां की कोख धन्य होती है जब ऐसे लाल पैदा होते है।
राजीव भाई हमारे भाई ही नहीं बल्कि देश के करोडों-करोडों लोगों के भाई थे।
प्रतिभावान, विनम्र, निष्कलंक जीवन था राजीव भाई का।
राजीव भाई को इन्साइक्लोपीडिया कहा जाता था। वे चलते-फिरते अथाह ज्ञान के सागर थे।
5000 वर्षों का ज्ञान, असीम स्मृति वाले, अपरिमित क्षमता वाले थे राजीव भाई।
आर्थिक मामलों पर उनका स्वदेशी विचार सामान्य जन से लेकर बुद्धिजीवियों तक को आज भी प्रभावित करता है
उनकी जिव्हा पर स्वयं माँ सरस्वती जी विराजमान रहते थे.
उनकी आवाज में इतना ओज है की जो भी उनको एक बार सुन ले वो उनका भक्त हो जाये.
मीडिया ने कभी भी श्री राजीव दीक्षित को एवं उनके व्याख्यानों को नहीं दिखाया नहीं तो आज हमारा देश महाशक्ति बन चुका होता. लेकिन फिर भी उनके पुरुषार्थ की वजह से आज देश जाग रहा है तथा उनके सपनो के भारत को बनाने के लिए लाखो करोडो लोग तैयार हो चुके है, तथा दिन-रात कार्य कर रहे है.
अब इस देश को विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता क्योकि इसकी नीव श्री राजीव दीक्षित के हाथो से स्थापित की गई है.
श्री राजीव दीक्षित के समर्थक उनके कार्यो को पूरा करने के लिए अपनी जान तक देने को तैयार रहते है.
बहुत ही जल्द एक नए भारत का उदय आप देखेंगे.
एक श्री राजीव दीक्षित जी के शरीर को तो मिटा दिया गया है पर अब इस देश में लाखो-करोडो राजीव भाई पैदा हो गए है उन्हें मिटाना मुशकिल ही नहीं वरन असंभव भी है, हम सब मिलकर स्वर्णिम भारत का निर्माण अवश्य करेंगे चाहे कुछ भी हो जाये.
श्री राजीव दीक्षित जी कोई व्यक्ति नहीं थे, अपितु वो एक “दिव्य-आत्मा”, एक विचार, एक क्रांति का आगाज, एक स्वदेशी अलख थे.
वो भारत मां के अनमोल रत्न थे। जब वह बोलते थे तो घण्टों मन्त्र-मुग्ध होकर लोग उनको सुनते रहा करते थे।
राजीव भाई का मानना था कि उदारीकरण, निजीकरण, तथा वैश्वीकरण, ये तीन ऐसी बुराइयां है, जो हमारे समाज को तथा देश की संस्कृति व विरासत को तोड़ रही है |
भारतीय न्यायपालिका तथा क़ानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि भारत अभी भी उन कानूनों तथा अधिनियमों में जकड़ा हुआ है जिनका निर्माण ब्रिटिश राज में किया गया था , और इससे देश लगातार गर्त में जाता जा रहा है |
राजीव दीक्षित जी स्वदेशी जनरल स्टोर्स कि एक श्रृंखला बनाने का समर्थन करते थे, जहाँ पर सिर्फ भारत में बने उत्पाद ही बेंचे जाते हैं | इसके पीछे के अवधारणा यह थी, कि उपभोक्ता सस्ते दामों पर उत्पाद तथा सेवाएं ले सकता है और इससे निर्माता से लेकर उपभोक्ता, सभी को सामान फायदा मिलता है, अन्यथा ज्यादातर धन निर्माता व आपूर्तिकर्ता कि झोली में चला जाता है |
राजीव भाई ने टैक्स व्यवस्था के विकेन्द्रीकरण की मांग की, और कहा कि वर्तमान व्यवस्था दफ्तरशाही में भ्रष्टाचार का मूल कारण है | उनका दावा था कि कि टैक्स का 80 प्रतिशत भाग राजनेताओं व अधिकारी वर्ग को भुगतान करने में ही चला जाता है, और सिर्फ 20 प्रतिशत विकास कार्यों में लगता है |
उन्होंने वर्तमान बजट व्यवस्था की पहले कि ब्रिटिश बजट व्यवस्था से तुलना की, और इन दोनों व्यवस्थाओं को सामान बताते हुए आंकड़े पेश किये |
राजीव भाई का स्पष्ठ मत था कि आधुनिक विचारकों ने कृषि क्षेत्र को उपेक्षित कर दिया है | किसान का अत्यधिक शोषण हो रहा है तथा वे आत्महत्या की कगार पर पहुँच चुके हैं |
वो हर बात तथ्यों, सबूतों, आकडो एवं दस्तावेजों के साथ कहते थे. जब वो भारत के स्वर्णिम अतीत का गुण-गान करते अथवा विदेशियों के द्वारा की गई आर्थिक लूट के आँकडे गिनवाना शुरू होते थे तो प्रतीत होता था जेसे उनका दिमाग कम्प्यूटर से भी तेज चलता हो।
उस “दिव्य-आत्मा” के दिमाग में ५,००० से भी ज्यादा वर्षों का ज्ञान समाहित था.
उन्हें चलता-फिरता सुपर कम्पुटर एवं एनसाइक्लोपिडिया कहा जाता था.
श्री राजीव दीक्षित जी को अगर ज्ञात-अज्ञात इतिहास के सबसे महान स्वदेशी महापुरुष कहा जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी.
श्री राजीव भाई जी का जीवन सादगी, पवित्रता, समर्पण, उत्साह, जोश, स्वदेशी भाव से पूर्ण था. उन्होंने पहले “आज़ादी बचाओ आंदोलन” और फिर “भारत स्वाभिमान” के तहत पुरे देश को संगठित और आंदोलित किया....
बारम्बार प्रणाम है ऐसे माता-पिता के चरणों में जिन्होंने इस “दिव्य-आत्मा” को जन्म दिया. वो अपने माता-पिता के ही नहीं अपितु सम्पूर्ण देश के प्यारे-दुलारे है. वो माँ भारती के लाल है.

How to be powerful... अपनी सेहत बनाने की सोच रहे हैं????

सर्दियाँ आ चुकी है , आयुर्वेद के साथ इस मौसम का लाभ उठाएँ ...

इन सर्दियों में यदि आप अपनी सेहत बनाने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले पेट साफ करने की जरूरत है। पेट में कब्ज रहेगा तो कितने ही पौष्टिक पदार्थों का सेवन करें, लाभ नहीं होगा। भोजन समय पर तथा चबा-चबाकर खाना चाहिए, ताकि पाचन शक्ति ठीक बनी रहे, फिर पौष्टिक आहार या औषधि का सेवन करना चाहिए।

आचार्य चरक ने कहा है कि पुरुष के शरीर में वीर्य तथा स्त्री के शरीर में ओज होना चाहिए, तभी चेहरे पर चमक व कांति नजर आती है और शरीर पुष्ट दिखता है।
कुछ ऐसे पौष्टिक पदार्थों की जानकारी दे रहा हूँ , जिन्हें किशोरावस्था से लेकर युवावस्था तक के लोग सेवन कर लाभ उठा सकते हैं और बलवान बन सकते हैं-

* सोते समय एक गिलास मीठे गुनगुने गर्म दूध में एक चम्मच शुद्ध घी डालकर पीना चाहिए।
* दूध की मलाई तथा पिसी मिश्री जरूरत के अनुसार मिलाकर खाना चाहिए, यह अत्यंत शक्तिवर्द्धक है।

* एक बादाम को पत्थर पर घिसकर दूध में मिलाकर पीना चाहिए, इससे अपार बल मिलता है। बादाम को घिसकर ही उपयोग में लें।
* छाछ से निकाला गया ताजा माखन तथा मिश्री मिलाकर खाना चाहिए, ऊपर से पानी बिलकुल न पिएँ।

* 50 ग्राम उड़द की दाल आधा लीटर दूध में पकाकर खीर बनाकर खाने से अपार बल प्राप्त होता है। यह खीर पूरे शरीर को पुष्ट करती है।

* प्रातः एक पाव दूध तथा दो-तीन केले साथ में खाने से बल मिलता है, कांति बढ़ती है।

* एक चम्मच असगंध चूर्ण तथा एक चम्मच मिश्री मिलाकर गुनगुने एक पाव दूर के साथ प्रातः व रात को सेवन करें, रात को सेवन के बाद कुल्ला कर सो जाएँ। 40 दिन में परिवर्तन नजर आने लगेगा।

* सफेद मूसली या धोली मूसली का पावडर, जो स्वयं कूटकर बनाया हो, एक चम्मच तथा पिसी मिश्री एक चम्मच लेकर सुबह व रात को सोने से पहले गुनगुने एक पाव दूध के साथ लें। यह अत्यंत शक्तिवर्धक है।

* सुबह-शाम भोजन के बाद सेवफल, अनार, केले या जो भी मौसमी फल हों, खाएँ।
* सुबह एक पाव ठंडे दूध में एक बड़ा चम्मच शहद मिलाकर पीने से खून साफ होता है, शरीर में खून की वृद्धि होती है।

* प्याज का रस 2 चम्मच, शहद 1 चम्मच, घी चौथाई चम्मच मिलाकर सेवन करें और स्वयं शक्ति का चमत्कार देखें। यह नुस्खा यौन शक्ति बढ़ाने में अचूक है। ऊपर वर्णित नुस्खे स्त्री-पुरुष दोनों के लिए समान हैं। इन्हें अनुकूल मात्रा में उचित विधि से सुबह-रात को सेवन सेवन करना चाहिए।

नरेन्द्र मोदी के बारे में दिलचस्प बातें -

1. बचपन से ही मोदी साहसी थे। एक बार तालाब में नहाते हुए एक मगरमच्छ का बच्चा निकल आया। उनके साथ जितने भी बच्चे नहा रहे थे, वे डर कर भाग गए पर मोदी नहीं डरे।उन्होनें उसे पकड़ा और घर ले गए।वो तो उसे पालना चाहते थे पर उनकी मां ने मना कर दिया।फिर वे उस मगरमच्छ के बच्चे को वापस तालाब में छोड़ आए।

2. मोदी कभी छुट्टी नहीं लेते। सरकारी छुट्टियां भी नहीं। वे हमेशा काम करते रहते हैं।

3.सीएम रहते हुए जब भी उनके परिवार या परिवार के किसी सदस्य ने ट्रांसफर या सरकारी नौकरी की सिफारिश करने को कहा है, मोदी ने हमेशा ही मना कर दिया है।

4.मोदी से जब भी पूछा जाता है कि उनके परिवार में कितने सदस्य हैं, वे पूरे गुजरात को अपना परिवार बताते हैं और कहते हैं कि पूरे गुजरात के 6 करोड़ लोग उनका परिवार है।

5-वो अपने परिवार में सिर्फ अपनी माँ से ही मतलब रखते है | वो अपने हर जन्मदिन पर सब से पहले अपनी माँ का आशिर्वाद लेने जाते है | और बीच बीच के कई बार फोन करके अपनी माँ के स्वास्थ्य की जानकारी लेते रहते है |

गुजरात का एक और सच

उत्तरप्रदेश के बिजनौर के रहने वाले पेशे से वकील सैयद साल 1980 से अहमदाबाद में रह रहे हैं और उनकी टेबल की शान नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी एक तस्वीर.

सैयदकहतेहैं, "मैं बिजनौर जाता हूं तो दिन के छः घंटे बिजली मौजूद नहीं होती है लेकिन यहां छह मिनट को भी बिजली नहीं जाती. सड़कें देखो, लोगों का काम धंधा देखो, यहां पिछले दस सालों से दंगे तो छोड़ दो कर्फ्यू तक नहीं लगा. सब नरेन्द्र मोदी की बदौलत." सैयद दंगा पीड़ितों के मुक़दमे नहीं लड़ते क्योंकि वो जानते नहीं कि कौन पीड़ित है कौन अपराधी.

वो मानते हैं, "दंगे कोई करता नहीं बस हो जाता है. भीड़ जूनून में कुछ कर बैठती है और दंगे कहां नहीं होते?"

सैयद के अनुसार मोदी को 25 से 30 फ़ीसदी मुसलमान वोट मिलेंगे, "ख़ासतौर पर बोहरा, इस्मायली, शिया और वो सब जो पढ़े लिखे हैं." नरेन्द्र मोदी गुजरात के चुनावों में सदभावना और विकास की बात पर जोर दे रहे हैं और उनकी सभाओं में दाढ़ियाँ और टोपियाँ भी दिखने लगी हैं. दंगों के 10 साल बाद क्या सोच है राज्य के मुसलमानों की?

Gobbar ges


मित्रो बात संकल्प शक्ति की है ! अगर एक आदमी सिर्फ 120 गायों से पूरे गाँव को मुफ़त गैस बाँट सकता है ! तो सरकार भी कर सकती है ! लेकिन उसके लिए गाय बचाना जरूरी है !आज भारत मे रोज 50000 गाय कटती है !
कुल 3600 कत्ल खाने हैं ! जिनको सरकार ने लाएंसेंस दे रखा है गाय काटने का ! इसके इलावा 35000 कत्लखाने ऐसे हैं जो गैर कानूनी चल रहें है !!

हमे देश मे ऐसी सरकार चाहिए जो संसद मे गौ ह्त्या के बिल को पास करे ! गाय के गोबर की गैस से गाड़ी भी चलती है यहाँ क्लिक कर देखे !

आज सरकार सबसे ज्यादा तेल के घाटे (oil deficit) से परेशान है ! जो 2 लाख 50 हजार करोड़ से ऊपर निकल गया है ! विदेशो से कच्चा तेल आयात करना पढ़ता है !! गाय को बचा कर रसोई गैस की समस्या , स्कूटर गाड़ी चलाने की समस्या भी हल की जा सकती है ! गौ मूत्र सबसे ज्यादा 108 बीमारियाँ ठीक करता है ! गाय के गोबर से organic खेती कर 5लाख करोड़ का fertilizer का खर्चा बचाया जा सकता है !!

आज गाय बचेगी तो भारत बचेगा !

What is GDP?? GDP क्या है ??

ये GDP क्या बला है ?? रोजाना अखबार लिखा होता है की भारत की जीडीपी 8 .7 % है कभी कहा जाता है के 9 % है ; प्रधानमंत्री कहते है की हम 12 % जीडीपी हासिल कर सकते है पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलम कहते थे की हम 14 % भी कर सकते है , रोजाना आप जीडीपी के बारे में पड़ते है और आपको लगता है की जीडीपी जितनी बड़े उतनी देश की तरक्की होगी । कभी किसीने जानने की कौशिश की के ये जीडीपी है क्या ? आम आदमी की भाषा में जीडीपी का क्या मतलब है ये हमें आज तक किसी ने नही समझाया । GDP actually the amount of money that exchanges hand . माने जो पैसा आप आदान प्रदान करते है लिखित में वो अगर हम जोड़ ले तो जीडीपी बनती है ।

अगर एक पेड़ खड़ा है तो जीडीपी नही बढती , लेकिन अगर आप उस पेड़ को काट देते है तो जीडीपी बढती है किउंकि पेड़ को काटने के बाद पैसा आदान प्रदान होता है , पर पेड़ अगर खड़ा है तो तो कोई इकनोमिक activity नही होती जीडीपी भी नही बढती । अगर भारत की सारे पेड़ काट दिया जाये तो भारत की जीडीपी 27 % हो जाएगी जो आज करीब 7 % है । आप बताइए आपको 27 % जीडीपी चाहिए या नही !

अगर नदी साफ़ बह रही है तो जीडीपी नही बढती पर अगर आप नदी को गंध करते है तो जीडीपी तिन बार बढती है । पहले नदी पास उद्योग लगाने से जीडीपी बढ गयी, फिर नदी को साफ़ करने के लिए हज़ार करोड़ का प्रोजेक्ट लेके ए जीडीपी फिर बढ गयी , फिर लोगोने नदी के दूषित पानी का इस्तेमाल किया बीमार पड़े, डॉक्टर के पास गए डॉक्टर ने फीस ली , फिर जीडीपी बढ गयी ।

अगर आप कोई कार खरीदते है , आपने पैसा दिया किसीने पैसा लिया तो जीडीपी बढ गयी, आपने कार को चलाने के लिए पेट्रोल ख़रीदा जीडीपी फिर बढ गयी, कार के दूषित धुयाँ से आप बीमार हुए , आप डॉक्टर के पास गए , आपने फीस दी उसने फीस ली और फिर जीडीपी बढ गयी । जितनी कारे आयेगी देश में उतनी जीडीपी तिन बार बढ जाएगी और इस देश रोजाना 4000 जादा कारे खरीदी जाती है , 25000 से जादा मोटर साइकल खरीदी जाती है और सरकार भी इसकी तरफ जोर देती है किउंकि येही एक तरीका है के देश की जीडीपी बड़े ।

हर बड़े अख़बार में कोका कोला और पेप्सी कोला का advertisement आता है और ये भी सब जानते है के ये कितने खतरनाक और जेहरिला है सेहत के लिए पर फिर भी सब सरकारे चुप है और आँखे बंध करके रखा है किउंकि जब भी आप कोका कोला पीते है देश की जीडीपी दो बार बढती है । पहले आप कोका कोला ख़रीदा पैसे दिया जीडीपी बढ गया , फिर पिने के बाद बीमार पड़े डॉक्टर के पास गए , डॉक्टर को फीस दिया जीडीपी बढ गयी ।

आज अमेरिका में चार लाख लोग हर साल मरते है किउंकि वो खाना खाते है , किउंकि जो जंक फ़ूड है कार्बोनेटेड ड्रिंक्स है वो खाने से मोटापा और बीमारी होती है , आज 62 % अमेरिका के लोग क्लीनिकली मोटापा के सिकार है और हमारे देश में 62 %लोग तो
कुपोषन के सिकार है । ये भी जीडीपी बदने का एक तरीका है , जितना जादा प्रदुषण खाने में होगा उतना जादा जीडीपी बढता है ।

आज अमेरिका में चार लाख लोग हर साल मरते है किउंकि वो खाना खाते है , किउंकि जो जंक फ़ूड है कार्बोनेटेड ड्रिंक्स है वो खाने से मोटापा और बीमारी होती है , आज 62 % अमेरिका के लोग क्लीनिकली मोटापा के सिकार है और हमारे देश में 62 %लोग तो कुपोषन के सिकार है । ये भी जीडीपी बदने का एक तरीका है , जितना जादा प्रदुषण खाने में होगा उतना जादा जीडीपी बढता है । पहले फ़ूड इंडस्ट्री की बृद्धि हुई जीडीपी बड़ी ,उसके साथ फार्मासिउटीकाल्स की बृद्धि हुई फिर जीडीपी बढ गयी , फिर इसके साथ इन्सिउरेंस की भी बृद्धि हुई । ये तिन इंडस्ट्री आपस में जुडी हुई है इसीलिए आज इन्सिउरेंस इंडस्ट्री फ़ूड में पैसा लगा रहा है किउंकि आप जितना जादा ख़राब फ़ूड खायेंगे इन तिन इंडस्ट्री का बृद्धि होगी और जीडीपी बढेगी । अब क्या आपको जीडीपी बढानी है या घर में खाना बनाना है ! अब घर में खाना बनाने से जीडीपी नही बढती । इस मायाजाल को समझे ।

अमेरिका में आज करीब चार करोड़ लोग भूखे पेट सोते है यूरोप में भी चार करोड़ लोग भूखे सो रहे है , भारत में सरकारी आंकड़ा के अनुसार करीब 32 करोड़ लोग भूखे सोते है , अगर जीडीपी ही एक विकास का सूचक होती तो अमेरिका में भूख ख़तम हो जानी चाहिए थी पर अमेरिका और यूरोप में भूख बढ रही है भारत में भी जीडीपी के साथ भूख बढ रही है ।